THE AYODHYA TIMES

DESH KI TAZZA NEWS

गैस की सांस अटकी: दूसरा LPG जहाज पहुंचा, फिर भी सप्लाई पर मंडरा रहा संकट”

lpg-supply-crisis-india

नई दिल्ली: देश में रसोई गैस (एलपीजी) की सप्लाई को लेकर तस्वीर इन दिनों कुछ ऐसी है—ऊपर से सब ठीक-ठाक दिख रहा है, लेकिन अंदर ही अंदर दबाव बढ़ता जा रहा है। मंगलवार सुबह एक और एलपीजी से भरा जहाज भारतीय तट पर पहुंचा, जिससे थोड़ी राहत जरूर मिली, मगर सरकार खुद मान रही है कि स्थिति अभी भी “चिंताजनक” बनी हुई है।

सरकार के अधिकारियों ने साफ कहा है कि हालात पूरी तरह स्थिर नहीं हैं। अगर आने वाले कुछ दिनों में और जहाज समय पर नहीं पहुंचे, तो समस्या बढ़ सकती है। सीधी भाषा में कहें तो अभी गैस मिल रही है, लेकिन बैकअप उतना मजबूत नहीं है कि लंबी परेशानी झेल सके।

मंगलवार तड़के गुजरात के वाडिनार पोर्ट पर “नंदा देवी” जहाज पहुंचा, जबकि एक दिन पहले “शिवालिक” जहाज मुंद्रा पोर्ट पर लगा था। इन दोनों जहाजों से मिलाकर करीब 93 हजार टन एलपीजी देश में आई है। सुनने में यह बड़ी मात्रा लगती है, लेकिन भारत जैसे विशाल देश के लिए यह सिर्फ कुछ दिनों की जरूरत ही पूरी कर पाती है।

असल दिक्कत सप्लाई के रास्ते में फंसी हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है और उसमें भी ज्यादातर गैस पश्चिम एशिया से आती है। यह सप्लाई एक अहम समुद्री रास्ते—होर्मुज जलडमरूमध्य—से होकर गुजरती है। अभी उसी इलाके में तनाव चल रहा है, जिसकी वजह से कई जहाज रास्ते में अटके हुए हैं या देरी से पहुंच रहे हैं।

यही वजह है कि सरकार बार-बार सावधानी बरतने की बात कह रही है। हालांकि राहत की बात यह है कि अभी तक किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर का स्टॉक खत्म नहीं हुआ है और आम लोगों को गैस मिल रही है। लेकिन अगर सप्लाई में देरी जारी रही, तो असर सीधे घरों तक पहुंच सकता है।

देश में रोजाना करीब एक लाख टन एलपीजी की खपत होती है, जिसमें से लगभग 85 प्रतिशत घरेलू इस्तेमाल में जाता है। यानी हर घर की रसोई इसी पर टिकी है। लेकिन उत्पादन की बात करें तो भारत खुद सिर्फ आधी जरूरत ही पूरी कर पाता है, बाकी के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।

सरकार ने हालात से निपटने के लिए दूसरे विकल्प भी तलाशने शुरू कर दिए हैं। अमेरिका से एलपीजी खरीदी गई है, लेकिन वहां से भारत तक पहुंचने में चार से पांच हफ्ते लगेंगे। वहीं रूस से एलएनजी मंगाने की योजना है, जिसे एलपीजी में बदलने में अतिरिक्त समय लगेगा। यानी ये दोनों उपाय तुरंत राहत देने वाले नहीं हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चुनौती कम नहीं है। भारत और चीन जैसे बड़े देश एक साथ गैस खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में चीनी कंपनियां आक्रामक बोली लगाकर सौदे अपने पक्ष में कर रही हैं, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ रही हैं।

इस बीच सरकार कालाबाजारी पर भी सख्ती दिखा रही है। देशभर में हजारों छापे मारे गए हैं ताकि कोई भी इस स्थिति का गलत फायदा न उठा सके और आम लोगों तक गैस की सप्लाई सामान्य बनी रहे।

लंबे समय के समाधान के तौर पर सरकार अब पीएनजी यानी पाइप नेचुरल गैस पर ज्यादा जोर दे रही है। राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि पाइपलाइन बिछाने के काम को तेजी से आगे बढ़ाया जाए। इससे भविष्य में एलपीजी पर निर्भरता कम हो सकती है।

फिलहाल हालात नियंत्रण में जरूर हैं, लेकिन पूरी तरह सुरक्षित नहीं। आने वाले कुछ हफ्ते बेहद अहम होंगे। अगर अंतरराष्ट्रीय हालात सुधरते हैं और सप्लाई सामान्य होती है, तो स्थिति संभल जाएगी। वरना यह संकट सीधे आम लोगों की रसोई तक असर डाल सकता है।

<

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *