भारत में Hyundai Nexo का पायलट टेस्ट—एक नई शुरुआत
Hyundai Motor India ने Indian Oil Corporation (IOCL) के साथ दो सालों का एक समझौता किया है, जिसके तहत एक Hyundai Nexo SUV को 40,000 किमी तक भारत की सड़कों पर वास्तविक ड्राइव परीक्षण के लिए IndianOil को सौंपा गया है। इस परीक्षण का उद्देश्य भारतीय माहौल में इस हाइड्रोजन-फ्यूल सेल वाहन की प्रदर्शन क्षमता, विश्वसनीयता और रख-रखाव की लागत का जायज़ा लेना है। यह कदम भारत में स्वच्छ ऊर्जा और हरित मोबिलिटी की दिशा में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।
दूसरी पीढ़ी का Nexo – मस्तन डिजाइन और दमदार प्रदर्शन
2025 में Hyundai ने अपनी दूसरी पीढ़ी की Nexo को पेश किया, जो पहले INITIUM कॉन्सेप्ट पर आधारित है। नई ‘Art of Steel’ डिज़ाइन लैंग्वेज ने इसे एक भविष्यवादी रूप दिया है, जिसमें HTWO प्रतीक से प्रेरित ग्रिड-शेप वाले लाइट्स शामिल हैं। इसमें अब 6.69 किलो तक हाइड्रोजन स्टोर करने की क्षमता है, जिससे एक बार फ़्यूल भरने पर 700 किमी से ज़्यादा की यात्रा संभव है—ये दूरी पुराने मॉडल से कहीं ज़्यादा है। पावर में भी सुधार हुआ है—अब मोटर 204 hp की ताकत और 350 Nm टॉर्क देती है, और 0-100 किमी/घंटा की रफ्तार 7.8 सेकंड में हासिल हो जाती है।
तकनीकी विशेषताएँ और सुरक्षा
पहली पीढ़ी का Hyundai Nexo 95 kW फ्यूल सेल स्टैक और 40 kWh बैटरी से लैस था, जो मोटर को 161 hp और लगभग 395 Nm का टॉर्क देता था। यह संयोजन लंबे समय तक शांत और स्मूद ड्राइविंग का अनुभव प्रदान करता है। सुरक्षा के मामले में यह मॉडल Euro NCAP द्वारा 5-स्टार रेटिंग प्राप्त कर चुका है, जो इसकी मजबूती और भरोसेमंद डिज़ाइन को दर्शाता है।
ध्यान देने योग्य चुनौतियाँ
हर वाहन के साथ कुछ चुनौतियाँ भी आती हैं। Hyundai ने 2019 से 2024 तक बने लगभग 1,600 Nexo SUVs को U.S. और Canada में एक सुरक्षा अपील के कारण रिकॉल किया था। इसमें एक प्रेशर-रिलीफ डिवाइस में खराबी पाई गई थी, जो हाइड्रोजन लीक और संभावित आग का खतरा पैदा कर सकती थी। इस वजह से कंपनी ने वाहन चालकों को सलाह दी थी कि वे समस्या के समाधान तक गाड़ी को बाहरी जगह पर पार्क करें।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य—दूर देखने की दूरदृष्टि
दुनिया भर में Hyundai लगातार हाइड्रोजन तकनीक में निवेश कर रहा है। हालांकि बैटरी-इलेक्ट्रिक वाहनों की तुलना में फ्यूल-सेल वाहनों का इन्फ्रास्ट्रक्चर अभी भी सीमित है, लेकिन एशिया में हाइड्रोजन नेटवर्क तेज़ी से बढ़ रहा है। Hyundai जैसी कंपनियाँ इस दिशा में लीडरशिप निभा रही हैं और आने वाले वर्षों में इसकी पहुंच और तकनीकी दक्षता बढ़ने की उम्मीद है।
